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फॉर्म-16 के नाम पर लाखों का भुगतान! क्या स्वास्थ्य विभाग में वित्तीय अनुशासन पर उठेगा बड़ा सवाल?

राजनांदगांव।राजनांदगांव जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में आयकर से संबंधित फॉर्म-16 एवं टीडीएस कार्यों के लिए अधिवक्ताओं को लाखों रुपये का भुगतान किए जाने का मामला अब सार्वजनिक चर्चा का विषय बनता जा रहा है। इस मुद्दे ने स्वास्थ्य विभाग की वित्तीय पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिले के कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में अकाउंटेंट एवं लिपिक पदस्थ होने के बावजूद फॉर्म-16 तैयार करने और आयकर से जुड़े नियमित कार्यों के नाम पर बाहरी अधिवक्ताओं को भारी राशि का भुगतान किया जा रहा है। सामान्यतः यह कार्य विभागीय अकाउंटेंट और कार्यालयीन स्टाफ द्वारा किया जाना निर्धारित होता है।
नियमों और प्रावधानों पर उठे सवाल
वित्तीय नियमों एवं आयकर प्रावधानों के अनुसार फॉर्म-16 जारी करना, टीडीएस कटौती और आयकर से संबंधित प्रक्रिया शासकीय कार्यालय का नियमित लेखा कार्य है। ऐसे में इन कार्यों के लिए अधिवक्ताओं को लाखों रुपये का भुगतान किया जाना वैधानिकता और वित्तीय अनुशासन पर सवाल खड़ा करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अधिवक्ताओं को भुगतान सामान्यतः न्यायालयीन प्रकरणों, विधिक सलाह या विभागीय पैरवी के लिए किया जाता है। लेकिन यदि नियमित कार्यालयीन कार्यों के लिए बाहरी भुगतान हो रहा है, तो यह योजना मद के उपयोग और वित्तीय नियमों के पालन की दृष्टि से जांच का विषय है।
प्रशिक्षण और जिम्मेदारी का मुद्दा भी उठा
प्रेस रिपोर्टर क्लब का कहना है कि शासन द्वारा बाबू, लेखापाल और अकाउंटेंट को इसी प्रकार के वित्तीय कार्यों के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है। यदि कहीं प्रशिक्षण की कमी है, तो शासन को प्रशिक्षण व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए, न कि नियमित कार्यों के लिए बाहरी व्यक्तियों को लाखों रुपये का भुगतान किया जाए।
संगठन का मानना है कि यदि विभागीय कर्मचारी उपलब्ध होने के बावजूद अधिवक्ताओं को भुगतान किया जा रहा है, तो यह गंभीर वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आ सकता है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
प्रेस रिपोर्टर क्लब ने उठाई सख्त जांच की मांग
प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने कहा कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि:
अधिवक्ताओं को भुगतान किस योजना मद से किया जा रहा है
क्या उस योजना मद में इस प्रकार के भुगतान का प्रावधान है
किस आदेश और स्वीकृति के आधार पर भुगतान हुआ
उन्होंने कहा कि शासकीय धन जनता की अमानत है और इसका उपयोग वित्तीय अधिनियम एवं विभागीय नियमों के अनुसार ही होना चाहिए। यदि नियमों के विपरीत भुगतान किया गया है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होना आवश्यक है।
कार्रवाई नहीं हुई तो उच्चस्तरीय शिकायत
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यदि इस मामले में विभागीय स्तर पर जांच कर स्पष्टता नहीं लाई जाती है, तो प्रेस रिपोर्टर क्लब द्वारा वित्त विभाग, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एवं शासन स्तर पर लिखित शिकायत कर उच्चस्तरीय जांच की मांग की जाएगी।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी इस मामले में जांच कर अपने ही विभाग के कर्मचारियों पर कार्रवाई करने का साहस दिखाएंगे या नहीं?
प्रेस रिपोर्टर क्लब ने स्पष्ट किया है कि आने वाले समय में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में हो रहे ऐसे वित्तीय भुगतानों की जानकारी एकत्र कर वैधानिक जांच की मांग की जाएगी, ताकि शासकीय धन के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

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