सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा खेल! प्रतिबंधित दवाइयां लिखने वाले झोलाछाप पर कार्रवाई कब?

डोंगरगांव/राजनांदगांव।डोंगरगांव क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक गंभीर शिकायत सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है। क्षेत्र में बिना वैध मान्यता के चिकित्सकीय प्रैक्टिस और प्रतिबंधित दवाइयों के उपयोग संबंधी आरोपों ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, संबंधित मामले में खंड चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को भेजे गए पत्र में एक निजी प्रैक्टिस से जुड़े व्यक्ति द्वारा मरीजों को नियमों के विरुद्ध दवाइयां लिखने की शिकायत का उल्लेख किया गया है। शिकायत के आधार पर विभागीय स्तर पर जांच की प्रक्रिया भी प्रारंभ की गई है।
बिना मान्यता प्रैक्टिस के आरोप
शिकायत में यह आरोप लगाया गया है कि संबंधित व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत शैक्षणिक प्रमाण पत्र छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल से मान्यता प्राप्त नहीं है। इसके बावजूद एलोपैथिक दवाइयों का उपयोग कर उपचार करने की बात सामने आई है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मेडिकल नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
पहले हुई कार्रवाई, फिर भी सवाल सूत्रों के अनुसार, पूर्व में संबंधित क्लिनिक पर प्रशासनिक कार्रवाई और सील करने की प्रक्रिया अपनाई गई थी। इसके बावजूद दोबारा शिकायतें सामने आने से क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं।
जनता और सामाजिक संगठनों की चिंता स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि है और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।
प्रेस रिपोर्टर क्लब की प्रतिक्रिया
प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने कहा कि संगठन को भी स्वास्थ्य सेवाओं में अनियमितताओं संबंधी शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि आम जनता को सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में भी इस प्रकार की शिकायतें सामने आती हैं और कार्रवाई नहीं होती है, तो प्रेस रिपोर्टर क्लब द्वारा संबंधित विभागों, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा शासन स्तर पर लिखित शिकायत प्रस्तुत कर कार्रवाई की मांग की जाएगी।
फिलहाल मामला विभागीय जांच के अधीन है और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
