Wednesday, August 5, 2026
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वन विभाग के कंपाउंड में ही अवैध वृक्ष कटाई! 20 मीटर दूरी पर बैठे अधिकारी बने मूकदर्शक

राजनांदगांव।खुज्जी वन परिक्षेत्र अंतर्गत फॉरेस्ट कंपाउंड में ही अवैध रूप से फलदार वृक्ष की कटाई किया जाना वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हैरानी की बात यह है कि जिस स्थान पर यह अवैध कटाई हुई, वहां से महज 20 मीटर की दूरी पर वन परिक्षेत्र अधिकारी एवं डिप्टी रेंजर का कार्यालय स्थित है, इसके बावजूद मशीन से पेड़ काटे जाने की कार्रवाई को देखते हुए भी रोका नहीं गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक व्यक्ति बेखौफ होकर फॉरेस्ट कंपाउंड के भीतर करण जैसे फलदार वृक्ष को काटता रहा, जबकि मौके पर मौजूद वन विभाग के कर्मचारी और अधिकारी मूकदर्शक बने रहे। जब इस अवैध कटाई की जानकारी किसी जागरूक व्यक्ति एवं पत्रकार द्वारा दी गई और सवाल उठाया गया कि “क्या फॉरेस्ट कंपाउंड में हो रही कटाई पर कार्रवाई होगी या नहीं?”—तब जाकर विभागीय अमला हरकत में आया और औपचारिक कार्रवाई की गई।
यह पूरा मामला इस बात का प्रमाण है कि कार्रवाई संज्ञान से नहीं, दबाव से होती है। यदि यह कटाई फॉरेस्ट कंपाउंड में, अधिकारियों की आंखों के सामने नहीं होती, तो शायद कभी कार्रवाई होती ही नहीं।
प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने इस पूरे घटनाक्रम को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि
“जहां वन अधिकारी स्वयं बैठे हों, वहीं यदि अवैध वृक्ष कटाई हो और अधिकारी देखते रहें, तो उन्हें रक्षक कहना मुश्किल हो जाता है। आज स्थिति यह है कि रक्षक कम और भक्षक अधिक नजर आ रहे हैं।”
प्रेस रिपोर्टर क्लब ने मांग की है कि
जहां-जहां पेड़ कट रहे हैं, वहां स्वतः संज्ञान लेकर तत्काल कार्रवाई की जाए
फॉरेस्ट कंपाउंड जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में हुई कटाई की जवाबदेही तय की जाए
दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो
क्लब ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि वन विभाग ने इस तरह की घटनाओं को गंभीरता से नहीं लिया, तो आने वाले समय में इस पूरे मामले की औपचारिक शिकायत राजनांदगांव के डीएफओ कार्यालय में की जाएगी।
प्रेस रिपोर्टर क्लब ने दोहराया कि उनका उद्देश्य विभाग को बदनाम करना नहीं, बल्कि प्रकृति, पर्यावरण और वन संपदा की रक्षा सुनिश्चित करना है। लेकिन यदि वन रक्षक ही अपने कर्तव्यों से मुंह मोड़ेंगे, तो पर्यावरण संरक्षण केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।

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