सुकमा में रेत घाट ई-नीलामी पर उठे सवाल, पात्रता और नियमों को लेकर मिलीभगत के आरोप

सुकमा | 27 मार्च 2026
सुकमा जिले में सबरी नदी के सुपनार घाट की ई-नीलामी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। 27 मार्च 2026 को आयोजित इस ई-ऑक्शन प्रक्रिया पर स्थानीय लोगों और प्रतिभागियों ने नियम विरुद्ध कार्रवाई, पक्षपात और प्रशासनिक मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। मामले में कलेक्टर कार्यालय और खनिज विभाग की भूमिका पर भी प्रश्न उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, सुपनार घाट की ई-नीलामी में कुल 138 लोगों ने ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा लिया था। इनमें से 12 आवेदकों को विभिन्न त्रुटियों का हवाला देते हुए अपात्र घोषित कर दिया गया। अपात्र किए गए लोगों में 3 आवेदक सुकमा जिले के निवासी बताए जा रहे हैं। बताया गया कि किसी को निवास प्रमाण पत्र में त्रुटि, किसी को पैन कार्ड में कमी, तो किसी को आधार कार्ड में तकनीकी गलती बताकर नीलामी प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।
यहीं से पूरे मामले पर विवाद गहराने लगा है। आरोप है कि जहां छोटे-छोटे दस्तावेजी कारणों से कई आवेदकों को बाहर कर दिया गया, वहीं दूसरी ओर जिस नाम पर टेंडर प्रक्रिया में वित्तीय दस्तावेज प्रस्तुत किए गए, उसमें गंभीर विसंगति होने के बावजूद उसे मान्य कर दिया गया। दावा किया जा रहा है कि जिस टेंडर को स्वीकृति मिली, उसके समर्थन में जमा की गई एफडीआर (FDR) किसी अन्य नाम से बनी हुई है।
मामले को लेकर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि जिस नाम से एफडीआर तैयार की गई, वह एक शासकीय सेवक से संबंधित है, और जिस एसबीआई बैंक से एफडीआर बनाई गई, उसे भी प्रशासन द्वारा वैध मान लिया गया। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब दस्तावेजों में नाम का स्पष्ट अंतर है, तब ऐसी स्थिति में उस निविदा को पात्र कैसे माना गया? स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि दस्तावेजी त्रुटियों के आधार पर अन्य 12 लोगों को अपात्र किया जा सकता है, तो इस मामले में भी समान नियम लागू होना चाहिए था।
आरोप लगाने वालों का कहना है कि इस प्रकार की स्थिति में नियमानुसार री-ऑक्शन (पुनः नीलामी) की जानी चाहिए थी, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और विवाद-मुक्त रह सके। लेकिन ऐसा न कर सीधे टेंडर स्वीकृत कर देना कई गंभीर शंकाओं को जन्म दे रहा है। इससे यह आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि कहीं पूरी प्रक्रिया किसी पूर्व निर्धारित लाभ पहुंचाने की मंशा से तो प्रभावित नहीं हुई।
इस पूरे मामले ने जिले में प्रशासनिक पारदर्शिता, खनिज संसाधनों के आवंटन और निविदा नियमों के पालन को लेकर बहस तेज कर दी है। स्थानीय नागरिकों और प्रतिभागियों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए, अपात्र किए गए आवेदकों की फाइलों की पुनः समीक्षा हो, और यदि अनियमितता सिद्ध होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने कहा है कि इस मामले की पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जो वास्तविक और पात्र व्यक्ति है, उसे ही रेत घाट का आवंटन दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं होती है, तो आने वाले समय में इसकी शिकायत मुख्यमंत्री तथा खनिज विभाग के मंत्री से की जाएगी।
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और खनिज विभाग इस गंभीर विवाद पर क्या रुख अपनाते हैं, और क्या ई-नीलामी प्रक्रिया में उठे इन सवालों का संतोषजनक जवाब सामने आता है या नहीं।
