Wednesday, March 18, 2026
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राजनांदगांव के ग्रामीण इलाकों में बिना बिल दवाइयों की सप्लाई का बड़ा खेल?ग्रामीण चिकित्सकों तक लाखों की दवा पहुंची, जीएसटी चोरी और विभागीय मिलीभगत के आरोप

राजनांदगांव। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में दवाई सप्लाई को लेकर एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आ रहा है। आरोप है कि कुछ मेडिकल एजेंसियां ग्रामीण चिकित्सकों को बिना बिल लाखों रुपए की दवाइयों की सप्लाई कर रही हैं। यह मामला केवल अनियमित दवा वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जीएसटी चोरी, ड्रग नियमों की खुलेआम अनदेखी और विभागीय मौन जैसे गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में कथित रूप से ऐसे कई चिकित्सकों के क्लीनिक और घरों में भारी मात्रा में दवाइयां रखी जा रही हैं, जिनकी खरीद-बिक्री का न तो कोई वैध बिल दिख रहा है और न ही कोई पारदर्शी रिकॉर्ड। सवाल यह उठ रहा है कि जब बिना बिल दवा की सप्लाई हो रही है, तो क्या यह सीधे-सीधे राजस्व की चोरी नहीं है? क्या सरकार को मिलने वाला जीएसटी इस पूरे खेल में दबाया जा रहा है?
सबसे बड़ा प्रश्न ड्रग विभाग की भूमिका पर उठ रहा है। आखिर ग्रामीण क्षेत्रों में यदि बड़े पैमाने पर दवाइयों का अवैध भंडारण और वितरण हो रहा है, तो ड्रग इंस्पेक्टर मौन क्यों हैं? क्या उन्हें इसकी जानकारी नहीं है, या फिर जानकारी होते हुए भी आंखें मूंद ली गई हैं? यह भी चर्चा का विषय बनता जा रहा है कि कहीं एजेंसियों और जिम्मेदार अधिकारियों के बीच मिलीभगत तो नहीं?
स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी भी संदेह के घेरे में है। जिन लोगों के पास दवा रखने, बेचने या उपयोग करने का विधिसम्मत अधिकार नहीं है, उनके पास लाखों रुपए की दवाइयां कैसे पहुंच रही हैं? यदि यह सब खुलेआम हो रहा है, तो संबंधित विभाग अब तक कार्रवाई से दूर क्यों है?
इस मामले को लेकर प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि राजनांदगांव जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में दवा एजेंसियों द्वारा बिना बिल दवाइयों की सप्लाई और जीएसटी चोरी का मामला अत्यंत गंभीर है, और इसकी शिकायत जीएसटी विभाग सहित संबंधित विभागों में की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह केवल कर चोरी का मामला नहीं, बल्कि जनता के स्वास्थ्य और कानून दोनों के साथ खिलवाड़ है।
उन्होंने सवाल उठाया कि
क्या ड्रग विभाग इस पूरे मामले पर कार्रवाई करेगा?
क्या स्वास्थ्य विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे इस कथित दवा नेटवर्क की जांच करेगा?
क्या बिना बिल सप्लाई करने वाली एजेंसियों पर कठोर कार्रवाई होगी?
या फिर सब कुछ ऐसे ही चलता रहेगा और जिम्मेदार विभाग मौन साधे रहेंगे?
राजनांदगांव के ग्रामीण क्षेत्रों में दवाइयों की यह कथित अवैध सप्लाई अब एक बड़ा जनहित का मुद्दा बन चुकी है। जरूरत है कि ड्रग विभाग, स्वास्थ्य विभाग और जीएसटी विभाग संयुक्त जांच कर सच्चाई सामने लाएं, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। अन्यथा यह माना जाएगा कि विभागीय मौन ही इस पूरे खेल को संरक्षण दे रहा है।
प्रेस रिपोर्टर क्लब पूछता है सवाल —
बिना बिल दवा सप्लाई का यह खेल आखिर कब तक चलेगा?
जीएसटी चोरी करने वालों पर कार्रवाई कब होगी?
ग्रामीण क्षेत्रों में दवाइयों के अवैध भंडारण और वितरण पर रोक कब लगेगी?
और ड्रग इंस्पेक्टर की चुप्पी आखिर किसके हित में है?

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