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राजनांदगांव में सोनोग्राफी के बाद अब ‘दवा माफिया’ का खेल उजागरCMHO की चुप्पी पर फिर सवाल – कार्रवाई नहीं हुई तो जन आंदोलन करेगा प्रेस रिपोर्टर क्लब

राजनांदगांव (संस्कारधानी)।
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं को निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों में जबरन भेजे जाने का मामला अब केवल सोनोग्राफी तक सीमित नहीं रहा। अब सामने आ रहा है कि यही कमीशन आधारित नेटवर्क दवाइयों की खरीद में भी सक्रिय है। शासन द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, उप स्वास्थ्य केंद्र एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में निःशुल्क उपलब्ध दवाइयों के बावजूद मरीजों को जानबूझकर बाहर के मेडिकल स्टोर से महंगी दवाइयां लिखी जा रही हैं।
शासन की दवा होते हुए भी बाहर की दवा क्यों?
ग्रामीण महिलाओं और पुरुष मरीजों से बातचीत तथा भौतिक सत्यापन के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि—
हाई एंटीबायोटिक
आयरन, कैल्शियम, विटामिन
गर्भावस्था से जुड़ी आवश्यक दवाइयां
जो शासन के स्टॉक में स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध रहती हैं, उन्हें जानबूझकर पर्ची पर नहीं दिया जाता, बल्कि मरीजों को बाहर के निजी मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है।
कमीशन के चक्कर में महंगी दवाइयां
प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने बताया कि—
कई मामलों में महंगी ब्रांडेड दवाइयां लिखी जा रही हैं
समान जेनेरिक दवाइयां केंद्र में उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें नहीं दिया जाता
निजी मेडिकल स्टोरों से मोटी कमीशन की आशंका सामने आ रही है।
यह स्थिति ग्रामीण महिलाओं और पुरुष मरीजों के आर्थिक शोषण का स्पष्ट संकेत है।
सोनोग्राफी के बाद दवा से भी लूट जिस तरह सोनोग्राफी के नाम पर डर दिखाकर बार-बार जांच करवाई जा रही है, उसी तरह—
“बिना यह दवा लिए ठीक नहीं होगा”,
“यह इंजेक्शन बाहर से लेना पड़ेगा”,
“सरकारी दवा असरदार नहीं है”
जैसे शब्दों का उपयोग कर मरीजों को बाहर की दवाइयों की ओर धकेला जा रहा है।
CMHO की भूमिका फिर सवालों के घेरे में
प्रेस रिपोर्टर क्लब का सवाल है कि—
जब शासन हर स्वास्थ्य केंद्र को निःशुल्क दवाइयां उपलब्ध करा रहा है,
जब दवा वितरण का रिकॉर्ड अनिवार्य है,
जब मरीजों के पास बाहर की दवाइयों की पर्चियां मौजूद हैं,
तो फिर CMHO कार्यालय इस पूरे तंत्र की निगरानी क्यों नहीं कर रहा?
क्या यह भी वही प्रशासनिक शिथिलता है, जो सोनोग्राफी मामलों में दिखाई दे रही है?
जल्द सौंपा जाएगा सबूतों का पूरा पुलिंदा
प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने स्पष्ट किया कि—
“सोनोग्राफी पर्ची और रिपोर्ट के साथ-साथ अब बाहर की दवाइयों की पर्चियां, मेडिकल बिल और मरीजों के बयान भी एकत्र किए जा रहे हैं।
बहुत जल्द यह पूरा पुलिंदा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला कलेक्टर को सौंपा जाएगा और इसकी प्रतिलिपि स्वास्थ्य मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन को भी भेजी जाएगी।”
उन्होंने बताया कि प्रेस रिपोर्टर क्लब द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार भौतिक सत्यापन किया जा रहा है।
कानून और शासन के नियम स्पष्ट
शासन की दवाइयों को प्राथमिकता से देना अनिवार्य
बिना कारण बाहर की महंगी दवाइयां लिखना नियमों का उल्लंघन
सरकारी दवा होते हुए निजी मेडिकल स्टोर को लाभ पहुंचाना अनुशासनहीनता
दोष पाए जाने पर विभागीय व कानूनी कार्रवाई का प्रावधान
प्रेस रिपोर्टर क्लब का अंतिम अल्टीमेटम
प्रेस रिपोर्टर क्लब ने मांग की है कि—
सभी स्वास्थ्य केंद्रों में दवा स्टॉक और वितरण की जांच कराई जाए
यह स्पष्ट किया जाए कि बाहर की दवा किसके निर्देश पर लिखी गई
दोषी पाए जाने पर संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई हो
जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए
कार्रवाई नहीं तो सड़क पर उतरेगा प्रेस रिपोर्टर क्लब
प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने दो टूक कहा—
“यदि CMHO कार्यालय ने सोनोग्राफी और दवाइयों के इस पूरे नेटवर्क पर समय रहते ठोस और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की, तो प्रेस रिपोर्टर क्लब सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सभी दस्तावेज़ प्राप्त कर जन आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर शिकायत करने के लिए बाध्य होगा।
यह लड़ाई अब कागज तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सड़क तक जाएगी।”

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