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कृषि–मेडिकल डायरेक्ट सेलिंग का बड़ा खेल — उपभोक्ता और किसानों की लूट पर विभागीय चुप्पी

कृषि एवं मेडिकल उत्पादों के नाम पर सक्रिय डायरेक्ट सेलिंग/नेटवर्क मार्केटिंग कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर उपभोक्ताओं और किसानों के शोषण का गंभीर मामला सामने आ रहा है। आरोप है कि कई कंपनियां बिना वैधानिक अनुमति “हम-एक, हमारे-दो (लेफ्ट–राइट)” जैसे नेटवर्क मॉडल के जरिए लोगों को प्रलोभन देकर जोड़ रही हैं और दस गुना तक एमआरपी पर उत्पादों की सप्लाई कर रही हैं।
कृषि क्षेत्र में जैविक उत्पाद बताकर तथा मेडिकल क्षेत्र में इम्यूनिटी बूस्टिंग, एलर्जी रोधी, न्यूट्रीशन सप्लीमेंट जैसे आकर्षक दावों के साथ उत्पाद बाजार में उतारे जा रहे हैं। इन उत्पादों के दावों की वैज्ञानिक/विभागीय पुष्टि और अनिवार्य अनुमतियों का अभाव बताया जा रहा है। चिंताजनक तथ्य यह है कि विभागीय हस्तक्षेप लगभग शून्य नजर आता है और कई मामलों में अनुमति लेकर व्यवसाय करने वाली एजेंसियों/दुकानदारों के नियंत्रण से बाहर भी ऐसे उत्पाद खुले बाजार में दिखाई दे रहे हैं।
प्रेस रिपोर्टर क्लब के संरक्षक शिव शंकर सिंह ने कहा कि डायरेक्ट मार्केटिंग के नाम पर चल रहे इस नेटवर्क खेल का जमीन स्तर से लेकर शासन–प्रशासन तक व्यापक खुलासा किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी गतिविधियों में संलिप्त कंपनियों और उनके डीलर्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित कराने के लिए स्टेप-बाय-स्टेप आंदोलन खड़ा किया जाएगा और जिनके साथ अन्याय हुआ है, उन्हें न्याय दिलाने का संगठित प्रयास किया जाएगा।
प्रेस रिपोर्टर क्लब ने किसानों और उपभोक्ताओं से अपील की है कि ऐसे उत्पादों की खरीद केवल अधिकृत पिक-अप सेंटर या अनुमोदित चैनलों से ही करें। किसी भी अनधिकृत स्रोत से खरीदी करने पर फर्जीवाड़े और आर्थिक नुकसान का बड़ा जोखिम हो सकता है, जो सीधे उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।
उल्लेखनीय है कि इसी तरह के एक मामले में दुर्ग–धनोरा क्षेत्र में संचालित एक कंपनी के विरुद्ध रायपुर एवं दुर्ग कृषि विभाग में की गई शिकायत के बाद लगभग ₹2.83 करोड़ मूल्य की सामग्री सील कराई गई थी। इस कार्रवाई को अभियान की बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है और इससे यह संकेत मिलता है कि सख्त निगरानी और समयबद्ध हस्तक्षेप से ऐसे नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।
प्रेस रिपोर्टर क्लब ने संबंधित विभागों से मांग की है कि अनुमतियों की जांच, दावों की वैज्ञानिक पुष्टि, एमआरपी नियंत्रण और नेटवर्क संरचनाओं की वैधानिकता पर तत्काल कार्रवाई हो, ताकि किसानों और उपभोक्ताओं का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।

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