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जन्मदिन पर जाम: जेवरतला की सड़क ने दिखाया सत्ता को आईना

✍️ लाल टोपी राजू सोनी

राजनांदगांव।बालोद जिले के जेवरतला में आज जो नजारा दिखा, वह प्रदेश की राजनीति के लिए किसी चेतावनी से कम नहीं। टटेंगा, हरदी, औरी, गधरी, भरदा, जेवरतला और रानीतराई को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग—जहां हाई स्कूल, अस्पताल और गुण्डरदेही जाने का मुख्य रास्ता है—पिछले 25 वर्षों से जर्जर हालत में है। सरकारें कपड़ों की तरह बदलती रहीं, लेकिन सड़क की सूरत नहीं बदली।
आज इसी सड़क की बदहाली के विरोध में जेवरतला में चक्का जाम किया गया। खास बात यह रही कि यह प्रदर्शन उस दिन हुआ जब प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का जन्मदिन मनाया जा रहा था। जहां एक ओर शहरों में होर्डिंग-बैनरों पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर जन्मदिन की शुभकामनाएं दी जा रही थीं, वहीं गांव की सड़क पर “हाय-हाय” के नारे गूंज रहे थे।
होली के दिन शराब भट्टी खुले रहने के आदेश को लेकर भी लोगों में आक्रोश दिखा। प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया गया—ऐसा दृश्य प्रदेश में पहली बार देखने को मिला जब जन्मदिन के अवसर पर आशीर्वाद की जगह विरोध की आग सुलगी।
सड़क बनी संघर्ष का प्रतीक
जनवरी माह में सड़क निर्माण का आश्वासन दिया गया था। फरवरी आते-आते जनता का सब्र टूट गया। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे, कीचड़ और धूल ने आवागमन को संकट में डाल रखा है। एंबुलेंस, स्कूली छात्र और रोजमर्रा के राहगीर सभी परेशान हैं। चक्का जाम के कारण कई घंटों तक आवागमन बंद रहा और लोगों को भारी असुविधा झेलनी पड़ी।
राजनीति से ऊपर जनता की आवाज
इस आंदोलन की एक और खास बात रही—कांग्रेस और भाजपा के नेता एक साथ धरने पर बैठे नजर आए। विधायक कुंवर सिंह निषाद, भाजपा जिलाध्यक्ष चेमन देशमुख, जिला पंचायत सदस्य, जनपद सदस्य, सात सरपंच और अनेक पंचों ने सरकार की नाकामी पर सवाल उठाए।
विधायक कुंवर सिंह निषाद ने कहा कि सरकार के पास जनता को आश्वस्त करने और “लालीपाप” देने के अलावा कुछ नहीं है। उनके अनुसार, पूर्व सरकार में सड़क को मंजूरी दी गई थी, लेकिन वर्तमान में विकास कार्य ठप पड़े हैं।
वहीं भाजपा जिलाध्यक्ष चेमन देशमुख ने कहा कि सड़क की मंजूरी और बजट पास हो चुका है, केवल तकनीकी प्रक्रिया शेष है और दो-ढाई महीने में सुंदर सड़क का निर्माण शुरू हो जाएगा।
वादा या फिर एक और आश्वासन?
जेवरतला का यह चक्का जाम केवल एक सड़क का मुद्दा नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की हकीकत का आईना बन गया है। जनता पूछ रही है—क्या सरकारें केवल उत्सव और प्रचार के लिए बनती हैं, या बुनियादी सुविधाओं के लिए भी?
फिलहाल सड़क वही है, गड्ढे वही हैं, और जनता का आक्रोश भी वही। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार जन्मदिन की शुभकामनाओं के बीच विरोध की गूंज ज्यादा तेज सुनाई दी।
अब देखना यह है कि दो-ढाई महीने बाद जनता को सड़क मिलती है या फिर एक और “लालीपाप”।

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