भाठागांव स्थित श्री चन्द्रमौलिश्वर मंदिर: आस्था, विश्वास और भक्ति का शताब्दी प्रतीक


भाठागांव। क्षेत्र के सोठ भाठागांव में स्थित श्री चन्द्रमौलिश्वर मंदिर सौ वर्ष से अधिक प्राचीन आस्था का केंद्र माना जाता है। स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार यह मंदिर लंबे समय से शिवभक्तों की श्रद्धा और विश्वास का प्रमुख स्थल रहा है। मान्यता है कि यहां विराजमान भगवान शिव भक्तों की सच्ची प्रार्थनाएं स्वीकार करते हैं।

वरिष्ठ शिवभक्त प्रशांत कुमार क्षीरसागर ने बताया कि वर्तमान मंदिर परिसर के स्थान पर पूर्व में एक तालाब हुआ करता था, जिसके किनारे यह प्राचीन मंदिर स्थित था। समय के साथ मंदिर परिसर का विस्तार एवं संरक्षण किया गया, किंतु इसकी मूल आस्था और धार्मिक महत्व आज भी अक्षुण्ण है।

मंदिर परिसर में स्थापित विभिन्न प्रतीकात्मक शिलाखंडों के संबंध में श्रद्धालुओं की अपनी धार्मिक मान्यताएं हैं। मंदिर के भीतर छोटे पत्थरों को माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। मंदिर प्रांगण में स्थित एक बड़े पत्थर को नाग देवता तथा अन्य शिलाखंड को बजरंगबली का प्रतीक स्वरूप श्रद्धापूर्वक स्थापित किया गया है। मंदिर के दाहिनी ओर स्थित बजरंगबली की प्रतिमा प्राचीनकाल से स्थापित बताई जाती है, जबकि बाईं ओर कोने में स्थापित प्रतिमा को पुनः विधिवत प्रतिष्ठित किया गया है।
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना एवं “श्री शिवाय नमोस्तुभ्यम, हर-हर महादेव, जय भोलेनाथ” जैसे मंत्रोच्चार से आध्यात्मिक शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

हाल ही में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक एवं प्रसाद वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिवभक्तों ने सहभागिता की। प्रसाद वितरण एवं सेवा कार्य में प्रशांत कुमार क्षीरसागर, संतोष वर्मा, प्रभात वर्मा, राजेश वर्मा, सोनी, राजेश कुशवाहा, बी.सी.एन.जी. श्रीवास्तव, भैय्याजी सहित अन्य श्रद्धालुओं ने सक्रिय योगदान दिया।


मंदिर समिति एवं श्रद्धालुओं के सामूहिक प्रयासों से यह प्राचीन स्थल आज भी क्षेत्र में धार्मिक एकता, सामाजिक समरसता और आस्था का प्रेरणास्रोत बना हुआ है।
