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कानून को रौंदता अधिकारी या सत्ता की शह पर अपराध नगर पंचायत पलारी में सीएमओ के संरक्षण में बिजली चोरी का खेल उजागर

बालोद:- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले की नगर पंचायत पलारी में जो सामने आया है वह सिर्फ एक बिजली चोरी का मामला नहीं बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र पर तमाचा है जहां जिम्मेदारी की कुर्सी पर बैठा अधिकारी खुद कानून को पैरों तले कुचलता हुआ पकड़ा गया नगर पंचायत का सीएमओ कथित रूप से बिजली चोरी कर ब्रेकर मशीन चलवाता हुआ सामने आया और जब बिजली विभाग ने मौके पर कार्रवाई की तो दो मशीनें जब्त की गईं यह दृश्य अपने आप में सवाल नहीं बल्कि आरोप है सिस्टम पर सड़ांध का सबूत है।यह मामला कोई तकनीकी चूक नहीं बल्कि सीधा सीधा अपराध है बिजली चोरी भारतीय कानून में गंभीर आपराधिक कृत्य है लेकिन यहां अपराधी कोई आम व्यक्ति नहीं बल्कि वही अधिकारी है जिसे नियमों का पालन कराना था जब कानून का रक्षक ही भक्षक बन जाए तो लोकतंत्र की रीढ़ टूटती है।सीएमओ जैसे पद पर बैठा व्यक्ति अगर अवैध रूप से बिजली उपयोग कर मशीनें चलवा रहा है तो यह न केवल विद्युत अधिनियम का खुला उल्लंघन है बल्कि यह सार्वजनिक पद के दुरुपयोग की चरम सीमा है यह सरकारी कुर्सी को निजी स्वार्थ का औजार बनाने की साजिश है यह जनता के पैसे से अपराध कराने का दुस्साहस है।बिजली विभाग की कार्रवाई ने यह साबित कर दिया कि यह कोई अफवाह नहीं बल्कि वास्तविक अवैध गतिविधि थी सवाल यह है कि अगर कार्रवाई नहीं होती तो यह खेल कब तक चलता रहता क्या नगर पंचायत की आड़ में चोरी को वैध बना दिया गया था क्या प्रशासनिक ताकत अपराध के लिए ढाल बन चुकी है।यह कृत्य स्पष्ट रूप से विद्युत कानून के तहत दंडनीय है साथ ही यह शासकीय सेवा आचरण नियमों के अंतर्गत गंभीर कदाचार है ऐसे मामलों में निलंबन जांच और सेवा से बर्खास्तगी तक का प्रावधान है लेकिन यहां चुप्पी सबसे बड़ा अपराध बनती जा रही है।जिला प्रशासन की खामोशी संदेह को और गहरा करती है क्या यह संरक्षण का मामला है क्या सत्ता के गलियारों में सौदेबाजी शुरू हो चुकी है क्या फाइलों में सच्चाई को दबाने की तैयारी है जनता यह सब देख रही है और जवाब मांग रही है।यह मामला पलारी तक सीमित नहीं है यह उस सोच का प्रतीक है जहां अधिकारी खुद को कानून से ऊपर समझने लगते हैं यह उदाहरण बनना चाहिए ताकि संदेश जाए कि कुर्सी अपराध का लाइसेंस नहीं होती और पद जिम्मेदारी होता है ढाल नहीं अब सवाल केवल सीएमओ पर कार्रवाई का नहीं बल्कि पूरे प्रशासन की साख का है अगर यहां सख्त कदम नहीं उठे तो यह तय है कि कानून सिर्फ कमजोर के लिए रह जाएगा और ताकतवर खुलेआम चोरी करता रहेगा जनता अब चुप नहीं है सवाल खड़े हो चुके हैं और जवाब देना ही होगा

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