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महिला सरपंचों के अधिकारों में दखल बर्दाश्त नहीं : “सरपंच पति संस्कृति” पर रोक लगाने की मांग तेज

छत्तीसगढ़।प्रदेश की पंचायतीराज संस्थाओं में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के अधिकारों में हो रहे हस्तक्षेप को लेकर अब सख्त रुख अपनाने की मांग तेज हो गई है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार पंचायतों के कामकाज में महिला सरपंच, उपसरपंच अथवा अन्य महिला पंचायत पदाधिकारियों के रिश्तेदारों द्वारा किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
छत्तीसगढ़ शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 23 जून 2025 को अटल नगर नवा रायपुर से जारी पत्र क्रमांक 2025/559 में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि महिला पंचायत पदाधिकारियों के अधिकारों में उनके पति, भाई या अन्य रिश्तेदारों द्वारा दखल देना नियमों के विरुद्ध है। शासन के संज्ञान में यह बात आई थी कि कई पंचायतों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की जगह उनके परिजन पंचायत के निर्णय ले रहे हैं और कार्यों में हस्तक्षेप कर रहे हैं, जिससे पंचायत व्यवस्था की मूल भावना प्रभावित हो रही है।
जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि पंचायत कार्यालय परिसर के भीतर महिला पंचायत पदाधिकारियों के कार्य संचालन के दौरान उनके किसी भी रिश्तेदार या सगे-संबंधी को पंचायत के किसी भी कार्य में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं होगी। किसी भी कर्मचारी अथवा अधिकारी को यदि किसी विषय में निर्णय लेना हो, तो वह सीधे संबंधित महिला पंचायत पदाधिकारी से ही निर्देश प्राप्त करेगा, न कि उनके परिजनों से।
शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी पंचायत में महिला जनप्रतिनिधि के स्थान पर उनके रिश्तेदार कार्य करते हुए पाए जाते हैं या पंचायत के निर्णयों में दखल देते हैं, तो इसे गंभीर अनियमितता माना जाएगा। ऐसी स्थिति में संबंधित महिला पंचायत पदाधिकारी के खिलाफ छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
इधर प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने इस विषय पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण देकर उन्हें नेतृत्व और निर्णय लेने का अधिकार दिया गया है, लेकिन कई जगह “सरपंच पति” या अन्य रिश्तेदारों की दखलंदाजी से यह व्यवस्था कमजोर हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि पंचायतों में इस तरह की अनधिकृत दखलअंदाजी जारी रही तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था और महिला सशक्तिकरण दोनों के लिए गंभीर खतरा साबित होगा।
संजय सोनी ने कहा कि पंचायतों में नियमों का कड़ाई से पालन होना चाहिए और जहां भी महिला प्रतिनिधियों के नाम पर उनके रिश्तेदार पंचायत चला रहे हैं, वहां तत्काल जांच कर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि पंचायतों में महिला जनप्रतिनिधियों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए और “सरपंच पति संस्कृति” पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।
प्रदेश के सामाजिक संगठनों और ग्रामीण विकास से जुड़े विशेषज्ञों ने भी सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे पंचायत व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और महिलाओं को वास्तविक नेतृत्व का अवसर मिलेगा।

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