बालोद पंचायतों में विकास से ज्यादा ‘कमीशन मॉडल’ की चर्चा, व्यवस्था पर उठ रहे गंभीर सवाल

बालोद।छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में पंचायत स्तर पर हो रहे विकास कार्यों को लेकर अब ग्रामीण इलाकों में कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। शासन जहां ग्रामीण विकास और पारदर्शिता के बड़े-बड़े दावे कर रहा है, वहीं जमीनी स्तर पर कुछ पंचायतों में विकास कार्यों की गुणवत्ता और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय ग्रामीणों और क्षेत्रीय जानकारों के अनुसार, पंचायतों में बनने वाली सड़कों, भवनों और अन्य निर्माण कार्यों में पारदर्शिता को लेकर संदेह की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। चर्चा है कि कई योजनाओं में काम शुरू होने से पहले ही “प्रतिशत की गणित” तय होने की बातें सामने आ रही हैं। ऐसे में स्वाभाविक रूप से यह प्रश्न उठ रहा है कि विकास कार्यों की वास्तविक गुणवत्ता और उपयोगिता कितनी सुनिश्चित हो पा रही है।
सूत्रों की मानें तो जिले में खनिज न्यास निधि (DMF) सहित कई योजनाओं के माध्यम से पंचायतों तक करोड़ों रुपये की राशि पहुंच रही है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि इन योजनाओं का पूरा लाभ जमीनी स्तर पर अपेक्षित रूप में दिखाई नहीं दे रहा। कुछ स्थानों पर योजनाएं कागजों में तेजी से पूर्ण दिखाई जाती हैं, जबकि धरातल पर उनका प्रभाव अपेक्षाकृत सीमित बताया जा रहा है।
ग्रामीणों के बीच इस स्थिति को लेकर असंतोष भी देखने को मिल रहा है। कई लोग व्यंग्य में यह तक कहने लगे हैं कि
“हर शाख पर उल्लू बैठा है, अंजाम-ए-गुलिस्तां क्या होगा।”
यह कहावत अब पंचायत व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों का प्रतीक बनती दिखाई दे रही है।
इसी बीच जिले में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि पंचायतों के विकास कार्यों की आड़ में कुछ लोग अपना अलग ही “स्वयं विकास मॉडल” चला रहे हैं। हालांकि इन चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह स्थिति शासन की ग्रामीण विकास योजनाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर सकती है।
प्रेस रिपोर्टर क्लब ने उठाए सवाल
इस पूरे मामले को लेकर प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने भी गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से लगातार यह शिकायतें प्राप्त हो रही हैं कि ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत स्तर पर विकास कार्यों में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी ने कहा कि प्रेस रिपोर्टर क्लब को पंचायतों से संबंधित कई शिकायतें प्राप्त हो रही हैं, जिनमें कथित रूप से “कमीशन तंत्र” के सक्रिय होने की चर्चा की जा रही है। उन्होंने कहा कि संगठन इन शिकायतों को गंभीरता से ले रहा है और आने वाले समय में इस विषय पर और भी तथ्यात्मक समाचार प्रकाशित कर शासन और प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि
“भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि कहीं भी विकास कार्यों में अनियमितता या पारदर्शिता की कमी पाई जाती है तो उसे उजागर करना पत्रकारिता की जिम्मेदारी है।”
संजय सोनी ने यह भी कहा कि पंचायत स्तर पर हो रहे विकास कार्यों की निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है, ताकि शासन की योजनाओं का वास्तविक लाभ ग्रामीणों तक पहुंच सके।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारी इन चर्चाओं और सवालों को कितनी गंभीरता से लेते हैं। क्या पंचायतों में हो रहे विकास कार्यों की पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे, या फिर यह मुद्दा भी अन्य मामलों की तरह समय के साथ चर्चा तक ही सीमित रह जाएगा।
