Uncategorized

बच्चों की राशि में खेल! शिक्षक और प्राचार्य ही बन बैठे वेंडर – प्रेस रिपोर्टर क्लब ने दी कड़ी चेतावनी

राज्य शासन द्वारा शिक्षा विभाग के माध्यम से विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों की शैक्षणिक आवश्यकताओं, सामग्री क्रय एवं अन्य सुविधाओं के लिए प्रतिवर्ष विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत राशि उपलब्ध कराई जाती है। इन योजनाओं का उद्देश्य स्पष्ट है कि विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर संसाधन मिलें और शिक्षा व्यवस्था मजबूत हो।
लेकिन जमीनी स्तर पर सामने आ रही जानकारी बेहद चिंताजनक है। प्रदेश के कई प्राथमिक, मिडिल एवं हाई स्कूलों में शासन द्वारा बच्चों के लिए दी जाने वाली राशि का उपयोग नियमों के विपरीत किया जा रहा है। आरोप है कि कई स्थानों पर प्राचार्य और शिक्षक स्वयं ही वेंडर बनकर सामग्री आपूर्ति दिखा रहे हैं, जो कि वित्तीय नियमों का सीधा उल्लंघन है।
वित्तीय नियमों और शासकीय सेवा आचरण के अनुसार कोई भी शासकीय कर्मचारी स्वयं वेंडर बनकर उसी संस्था को सामग्री आपूर्ति नहीं कर सकता जहां वह पदस्थ है। यह स्थिति स्पष्ट रूप से वित्तीय अनियमितता, हितों के टकराव (Conflict of Interest) और शासन की पारदर्शिता नीति के विरुद्ध मानी जाती है।
प्रेस रिपोर्टर क्लब ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा है कि बच्चों के अधिकारों और शासन की राशि के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संगठन द्वारा प्रदेश के विभिन्न जिलों में ऐसे प्राथमिक, मिडिल और हाई स्कूलों की पहचान की जा रही है, जहां शिक्षक या प्राचार्य स्वयं वेंडर बनकर सरकारी राशि का उपयोग दिखा रहे हैं।
प्रेस रिपोर्टर क्लब के प्रदेश अध्यक्ष संजय सोनी का कहना है कि शासन द्वारा बच्चों के विकास और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए जो राशि दी जाती है, वह पूरी तरह विद्यार्थियों के हित में खर्च होनी चाहिए। यदि कोई प्राचार्य या शिक्षक स्वयं वेंडर बनकर उसी राशि से भुगतान लेता है तो यह न केवल वित्तीय नियमों का उल्लंघन है बल्कि बच्चों के अधिकारों के साथ भी अन्याय है।
उन्होंने आगे कहा कि प्रेस रिपोर्टर क्लब ऐसे मामलों को गंभीरता से संज्ञान में ले रहा है और आने वाले समय में प्रदेश भर के ऐसे विद्यालयों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध दस्तावेजों सहित शिकायत शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन और संबंधित जांच एजेंसियों के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।
संजय सोनी ने यह भी कहा कि यदि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई तो इस प्रकार की अनियमितताएं बच्चों के भविष्य को प्रभावित करेंगी। इसलिए शासन और विभाग को चाहिए कि ऐसे मामलों में तत्काल जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *