राजनांदगांव–मोहला मानपुर में “एक आधार, दो नियुक्ति” का मामला चर्चा में
लाल टोपी राजू सोनी


छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव और मोहला मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिलों में आबकारी विभाग से जुड़ा एक अनोखा मामला सामने आया है। आरोप है कि एक ही व्यक्ति—एक ही आधार नंबर और एक ही मोबाइल नंबर के साथ—दो अलग-अलग कंपनियों में दो पदों पर नियुक्त दिख रहा है। इस खुलासे के बाद प्रशासनिक प्रक्रियाओं और सत्यापन तंत्र पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, 20 नवंबर 2025 को जारी एक पत्र में छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड के अंतर्गत जोन क्रमांक 8, राजनांदगांव जिले की खुदरा मदिरा दुकानों के संचालन हेतु तुलेश्वर वर्मा उर्फ साहिल वर्मा का नाम “क्षेत्र पर्यवेक्षक” के रूप में प्रस्तावित किया गया। पत्र में उनका आधार नंबर और मोबाइल नंबर स्पष्ट रूप से दर्ज बताया जा रहा है।
इसी तारीख को एक अन्य दस्तावेज में यह उल्लेख मिलता है कि Bombay Entegret Security India Limited द्वारा मोहला मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले की मदिरा दुकानों के पर्यवेक्षण के लिए उसी नाम और कथित रूप से उसी आधार व मोबाइल नंबर वाले व्यक्ति को “जिला कोऑर्डिनेटर” नियुक्त किया गया है। दोनों नियुक्तियों की तिथि समान होना और पहचान संबंधी विवरणों का मेल खाना इस मामले को गंभीर बनाता है।
सामान्यतः किसी भी नियुक्ति में केवाईसी, दस्तावेज सत्यापन और सेवा शर्तों की स्पष्टता अनिवार्य होती है। यदि दोनों पद पूर्णकालिक प्रकृति के हैं, तो एक व्यक्ति का एक ही समय में दो जिलों में दायित्व निभाना कैसे संभव है—यह सबसे बड़ा प्रश्न है। क्या यह अनुबंध आधारित अंशकालिक व्यवस्था है? क्या दोनों कंपनियों के बीच किसी प्रकार का औपचारिक समन्वय है? या फिर यह केवल दस्तावेजी त्रुटि है? इन सवालों के जवाब अभी स्पष्ट नहीं हैं।
दस्तावेजों में यह भी उल्लेख बताया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है और वे किसी काली सूची में दर्ज नहीं हैं। कागजों में सब कुछ व्यवस्थित प्रतीत होता है, लेकिन दोहरी नियुक्ति की स्थिति ने निगरानी प्रणाली की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
स्थानीय स्तर पर नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने स्वतंत्र जांच की मांग की है। उनका कहना है कि दोनों नियुक्ति पत्रों का तकनीकी और प्रशासनिक सत्यापन होना चाहिए। संबंधित कंपनियों से स्पष्टीकरण लिया जाए और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाए तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए।
प्रदेश में विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार पारदर्शिता और सुशासन की बात करती है। ऐसे में यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही की कसौटी बन सकता है। यदि समयबद्ध जांच होती है और तथ्य सार्वजनिक किए जाते हैं, तो स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल “एक आधार, दो नियुक्ति” का यह मामला चर्चा और सवालों के केंद्र में है। जनता यह जानना चाहती है कि यह महज कागजी भ्रम है या नियमों की अनदेखी का उदाहरण। जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी, लेकिन तब तक यह प्रकरण प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता पर एक महत्वपूर्ण सवाल बनकर खड़ा है।
