शासकीय कन्या हाई स्कूल दमोह का परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत, छात्राओं ने रचा सफलता का इतिहास

दमोह। शिक्षा के क्षेत्र में एक और उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज करते हुए शासकीय कन्या हाई स्कूल दमोह ने सत्र 2025-26 की हाई स्कूल परीक्षा में 100 प्रतिशत परिणाम हासिल कर जिले का नाम गौरवान्वित किया है। विद्यालय की इस ऐतिहासिक सफलता से पूरे परिसर में उत्साह और गर्व का माहौल व्याप्त है।
विद्यालय से कक्षा 10वीं में कुल 86 छात्राएं परीक्षा में सम्मिलित हुई थीं और सभी छात्राओं ने सफलता अर्जित कर विद्यालय की उत्कृष्ट शैक्षणिक परंपरा को कायम रखा। यह उपलब्धि न केवल छात्राओं की कड़ी मेहनत का परिणाम है, बल्कि शिक्षकों के समर्पण और मार्गदर्शन का भी प्रतिफल है।
परीक्षा परिणाम में छात्राओं ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए मेरिट सूची में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।
प्रथम स्थान पर कुमारी अजुला मेरावी ने 89.06 प्रतिशत अंक प्राप्त कर विद्यालय का नाम रोशन किया। उल्लेखनीय है कि अजुला ने आदिवासी नवीन सीनियर छात्रावास में रहकर वार्डन ममता वाहने के मार्गदर्शन में यह सफलता हासिल की।
द्वितीय स्थान पर कुमारी प्रियवंदा जामरे ने 85.02 प्रतिशत अंक अर्जित किए।
तृतीय स्थान पर कुमारी रोशनी पाचे ने 83.06 प्रतिशत अंक प्राप्त कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के उपलक्ष्य में विद्यालय परिसर में एक सादगीपूर्ण किन्तु हर्षोल्लासपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संस्था की प्राचार्या प्रेमलता बिसेन ने तिलक-वंदन कर समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं का आत्मीय स्वागत किया तथा छात्राओं को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर छात्राओं, अभिभावकों एवं शिक्षकों ने मिठाई वितरित कर अपनी खुशी साझा की।
कार्यक्रम में एकीकृत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय दमोह के प्राचार्य के. एस. छेदाम ने भी उपस्थित होकर संपूर्ण टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता विद्यालय के अनुशासन, शिक्षकों की निष्ठा और छात्राओं की लगन का प्रत्यक्ष उदाहरण है।
प्राचार्या प्रेमलता बिसेन ने अपने संबोधन में कहा कि “छात्राओं की यह सफलता उनकी मेहनत और शिक्षकों के कुशल मार्गदर्शन का परिणाम है। हमारा लक्ष्य है कि भविष्य में भी विद्यालय इसी प्रकार उत्कृष्ट परिणाम देकर जिले और प्रदेश का नाम रोशन करता रहे।”
इस उपलब्धि में विद्यालय के समस्त शिक्षकों—एस. आर. उके, जसिन्ता खलको, सुषमा धारणे, ममता वाहने, वृन्दा मेश्राम, पूजा सोनी, समलबती खैरवार, संध्या राहंगडाले, शीला गौतम, माखन हिरवाने, रवि कांवरे—तथा सहयोगी स्टाफ बिलसोबाई तुरकर एवं दशरथ राठौर का विशेष योगदान रहा, जिनकी निष्ठा और समर्पण ने इस सफलता को संभव बनाया।
समापन में, यह परिणाम न केवल विद्यालय की उपलब्धि है, बल्कि समूचे क्षेत्र के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है, जो यह दर्शाता है कि सही मार्गदर्शन और दृढ़ संकल्प से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।
