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अजय चन्द्राकार: पक्ष में विपक्ष या विपक्ष में पक्ष?

✍️ लाल टोपी राजू सोनी, राजनांदगांव

छत्तीसगढ़ की राजनीति इन दिनों विधानसभा के भीतर कम और चौक-चौराहों पर ज्यादा समझी जा रही है। वजह हैं — भाजपा विधायक अजय चन्द्राकर। विधानसभा सत्र में उनके सवाल इतने तीखे हैं कि मंत्रीमंडल के चेहरों पर मुस्कान कम और माथे पर शिकन ज्यादा दिखाई दे रही है। जनता कन्फ्यूज है—चन्द्राकर जी सत्ता पक्ष में हैं या विपक्ष में?
छत्तीसगढ़ में इस समय भाजपा की सरकार है, और उसी भाजपा के वरिष्ठ विधायक जब अपनी ही सरकार से सवालों की बौछार करते हैं तो दृश्य कुछ ऐसा बन जाता है मानो विपक्ष का दायित्व भी उन्होंने ही ठेके पर ले लिया हो। मंत्री जवाब ढूंढते नजर आते हैं, अधिकारी फाइल पलटते हैं, और वित्त मंत्री सोचते हैं कि कलेक्टरी चलाना आसान था या सदन में जवाब देना?
कांग्रेस खेमे में खुशी की लहर है। उन्हें बिना मेहनत के एक सशक्त “विपक्षी स्वर” मिल गया है। वे ताली भी बजा रहे हैं और मुस्कुरा भी रहे हैं। इधर सत्ता पक्ष हल्के-फुल्के अंदाज में फजीहत को हंसी में उड़ाने की कोशिश कर रहा है। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मंत्रीमंडल में स्थान न मिलने की पीड़ा सवालों के रूप में प्रकट हो रही है। अब यह राजनीति है या मनोविज्ञान, तय करना कठिन है।
मुख्यमंत्री जी की भूमिका भी कम रोचक नहीं है। वे दिल्ली दरबार की ओर निहारते हुए राष्ट्रीय नेतृत्व—Narendra Modi और Amit Shah—के निर्देशों का पालन करने में व्यस्त दिखाई देते हैं। इधर पूर्व मुख्यमंत्री Raman Singh को राजनांदगांव की अगली चुनावी बिसात की चिंता सता रही है। टिकट किसे मिलेगा, यह सवाल भी हवा में तैर रहा है।
बजट की बात करें तो पिछला बजट अभी कागजों से बाहर पूरी तरह निकला नहीं था कि नया बजट सदन में आ धमका। मार्च नजदीक है, खर्च दिखाना है, काम जमीन पर है या नहीं—यह अलग प्रश्न है। 15वें वित्त आयोग की राशि कहां खर्च हो, इस पर भी मंथन जारी है। कागजों में पुल-पुलिया और सड़कें बन रही हैं, जमीन पर धूल उड़ रही है। शराब के दाम “साय-साय” बढ़ रहे हैं, पर विकास की रफ्तार “धीरे-धीरे” चल रही है।
खनन पर पाबंदी है, पर परिवहन की रॉयल्टी का हिसाब अलग कहानी कहता है। सरकार विचार कर रही है, समितियां बैठ रही हैं, और जनता पूछ रही है—“आखिर सरकार चला कौन रहा है?” हर चौक-चौराहे पर यही चर्चा है।
होली नजदीक है। महतारी वंदन योजना और किसानों की अंतर राशि समय से पहले देने की घोषणा है। त्योहार पर खुशियां बंटेंगी, शराब भट्ठियां भी चालू रहेंगी। राजनीति और राजस्व—दोनों का संतुलन कमाल का है।
जिला पंचायत सदस्य, जनपद सदस्य और सरपंच चुनाव जीतकर अब खुद ही सिर धुन रहे हैं। जनता उनसे जवाब मांग रही है, और वे सरकार से। पर जवाब देने का काम यदि अकेले अजय चन्द्राकर ही करेंगे तो मंत्रीमंडल किस दिन के लिए है?
बजट पास हो गया है, योजनाएं घोषित हो चुकी हैं, बयान भी आ गए हैं। पर जनता का भरोसा अभी “विचाराधीन” है। सत्ता और विपक्ष की रेखाएं धुंधली हो गई हैं। एक विधायक सवाल पूछ रहा है, पूरी सरकार जवाब तलाश रही है।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में यह नया प्रयोग है—“एक ही दल में पक्ष भी, विपक्ष भी।”
अब देखना यह है कि यह लोकतंत्र की मजबूती है या अंदरूनी असंतोष की अभिव्यक्ति। फिलहाल तो सदन में सबसे ज्यादा गूंजने वाला नाम एक ही है—अजय चन्द्राकर।
और जनता अब भी पूछ रही है—“सरकार चल कौन रहा है?”

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